वो यूँ रोता हैं हंथेलियों में सिर को छुपा के...
जैसे लकीरें मिट जाएँगी आँसूं बहा के !!
वो घर बनाये बैठा हैं साहिलों पे...
जैसे लहरें रुक जाएँगी, बाँध बना के !!
यकीन दिलाया था "मीत", पत्थरें भी बोलेंगी एक दिन...
पूजता हैं जिसे तू, अपना खुदा बना के !!
जैसे लकीरें मिट जाएँगी आँसूं बहा के !!
वो घर बनाये बैठा हैं साहिलों पे...
जैसे लहरें रुक जाएँगी, बाँध बना के !!
यकीन दिलाया था "मीत", पत्थरें भी बोलेंगी एक दिन...
पूजता हैं जिसे तू, अपना खुदा बना के !!
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