Monday, January 30, 2012

शायरी - 02

12-Jan-2012 00:28 AM

हमने यही सोच के बुलाया हैं वापस उसे...
इस बार अदब से "मीत", अलविदा तो कह सकूँ !!

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13-Jan-2012 1:13 AM

ज़हर पीता गया "मीत", और उसने रोका भी नहीं...
शायद मेरी शिकस्त पे उसे जस्न जो मनानी थी !!

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13-Jan-2012 23:53 PM


कहाँ तो तय था चलना सितारों से आगे...
तुम चार कदम चल के रुक क्यूँ गए "मीत" !!


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14-Jan-2012 14:20 PM


बेवाफियों के गज़ले लिख रहा था "मीत"...
जो उनको आते देखा, नगमे भूल गया !!


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15-Jan-2012 10:49 PM


कभी मुस्कुरा भी दिया करो "मीत" मुझसे से बात करते...
क्या तुम्हारी नज़र में, मैं इतना बुरा हूँ ?!


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16-Jan-2012 23:45 PM


वो चला गया "मीत", छोटी सी बात पे रूठकर...
जैसे मिल्लतों से उसे, एक मौके की तलाश थी !!


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17-Jan-2012 00:12 AM


सर्द हवाएं क्या चली, तड़प उठे सूखे पतें...
फिर जुड़ने की आसार में, अब भी जान बाकी हैं !!


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18-Jan-2012 23:38 PM


वो आकर चला गया, ढंग से देखा भी नहीं "मीत"...
नज़रे मिली ही थी... कि आँखें डबडबा गई !!


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20-Jan-2012 00:04 AM


ऐ  "मीत"ना कर इश्क तू मुसाफिरों से...
मंजिले दिखाता चल... मंजिलों की न आरज़ू कर !!

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22-Jan-2012 23:24 PM


बड़े अजीब हैं "मीत", तेरे शहर के लोग..
दिल तोड़ते हैं जिससे, उसी पत्थर को पूजते हैं !!


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23-Jan-2012 23:12 PM


आज बादल को बरसते देखा तो याद आया...
कभी जो बात नहीं होती तो... "मीत" रोया करते थे !!


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30-Jan-2012 23:55 PM


"मीत" ना कर शक मेरी काबिलियत पर... 
परिंदे परों से नहीं हौंसलों से उड़ते हैं !!

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31-Jan-2012 00:12 AM

क्यूँ रोता हैं जब, "मीत" खुदा बन बैठा...
तुने मोहब्बत भी की...तो इबादत की तरह !!


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31-Jan-2012 00:32 AM


"मीत" तुझे भूलने को उसने फ़रियाद किया होगा....
हिचकियाँ आई तो क्या लगा.. उसने याद किया होगा ??


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31-Jan-2012 00:45 AM


बड़े बेपरवाह हैं "मीत" तेरे लोग...
खुद को छोड़ गए.... जाते जाते !!


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